NRC (National Register of Citizens) क्या है?
क्या है एनआरसी.( NRC):-
एनआरसी या नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन बिल का मकसद अवैध रूप से भारत में बसे घुसपैठियों को बाहर निकालना है।अभी केवल असम में ही पूरा हुआ है। जबकि देश के गृह मंत्री अमित शाह ये साफ कर चुके हैं कि एनआरसी को पूरे भारत में लागू किया जाएगा।NRC का इतिहास ।
★.साल 1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया था. इसके बाद पूर्वी बंगाल और असम के रूप में एक नया प्रांत बनाया गया था. उस वक्त असम को पूर्वी बंगाल(अभी बांग्लादेश) से जोड़ा गया था. जब देश का बंटवारा हुआ तो यह डर भी पैदा हो गया था कि कहीं असम पूर्वी पाकिस्तान के साथ जोड़कर भारत से अलग न कर दिया जाए.
इसके बाद गोपीनाथ बोर्डोली की अगुवाई में असम विद्रोह शुरू हुआ. इस अभियान के बाद असम अपनी रक्षा करने में सफल रहा, लेकिन सिलहट पूर्वी पाकिस्तान में चला गया. साल 1950 में असम देश का राज्य बना. और इसमें तब के असम के निवासियों को शामिल किया गया था.
★अंग्रेजों के शासनकाल में चाय बागान में काम करने और खाली पड़ी जमीन पर खेती करने के लिए बिहार-बंगाल के लोग असम आते थे, इसलिए वहां के स्थानीय लोग बाहरी लोगों से द्वेष रखते थे.
1950 के दशक में ही बाहरी लोगों का असम आना राजनीतिक मुद्दा बनने लगा था, लेकिन आजादी के बाद में भी तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान और बाद में बांग्लादेश के लोगों का अवैध तरीके से असम आने का सिलसिला जारी रहा. बीच-बीच में इस मसले पर थोड़ी बहुत आवाज उठती रही लेकिन इस मुद्दे ने खास तूल नहीं पकड़ा.
NRC के हिसाब से 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है.
पूर्वी पाकिस्तान यानी बांग्लादेश में जब भाषा विवाद को लेकर आंतरिक संघर्ष शुरू हो गया तब पूर्वी पाकिस्तान में परिस्थितियां इतनी हिंसक हो गई कि वहां रहने वाले हिंदू-मुस्लिम की बड़ी आबादी ने भारत का रुख किया.
ऐसा कहा जाता है कि 1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना ने दमनकारी कार्रवाई शुरू की तो करीब 10 लाख लोगों ने बांग्लादेश सीमा पारकर असम में शरण ले ली. हालांकि उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि शरणार्थी चाहे किसी भी धर्म के हों, उन्हें वापस जाना होगा.
एनआरसी में क्या है आगे की राह?
अगर राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में आपका नाम नहीं है या आप अनिवार्य दस्तावेज जमा नहीं करा पाए हों तो आपको अपने दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए नागरिकता पाने का पूरा मौका दिया जाएगा.
««»»महत्वपूर्ण जानकारी»»««
★राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर सबसे पहले वर्ष 1951 में तैयार किया गया था ।
★1979 में अखिल आसाम छात्र संघ (AASU) द्वारा अवैध आप्रवासियों की पहचान और निर्वासन की मांग करते हुए एक 6 वर्षीय आन्दोलन चलाया गया था।
★15 अगस्त, 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अखिल असम छात्रसंघ का आन्दोलन शान्त हुआ था।
★असम में बांग्लादेशियों की बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर नागरिक सत्यापन की प्रक्रिया दिसंबर, 2012 में शुरू हुई थी। मई, 2015 में असम राज्य के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
★31 दिसंबर, 2017 को असम सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (NRC) मसौदे का पहला संस्करण जारी किया गया।
★भारतीय नागरिक के रूप में मान्यता प्रदान किए जाने हेतु 3.29 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 1.9 करोड़ लोगों को वैध भारतीय नागरिक माना गया है। शेष 1.39 करोड़ आवेदनों की विभिन्न स्तरों पर जांच जारी थी।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में गृह मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय में एक हलफनामा (Affidavit) दायर करते हुए कहा कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens-NRC) को तैयार करना नागरिकों और गैर-नागरिकों की पहचान हेतु किसी भी संप्रभु राष्ट्र के लिये एक अनिवार्य अभ्यास है।
★महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न संख्या १:-बंगाल का विभाजन कब हुआ?
प्रश्न संख्या 2:-असम विद्रोह किसके
नेतृत्व में शुरू किया गया था?
प्रश्न संख्या ३:-असम राज्य कब बना?
प्रश्न संख्या ४:-असम सरकार के द्वारा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का मसौदा कब तैयार किया गया?
★कृपया इन प्रश्नों का उत्तर कमेंट में डालें
««»» धन्यवाद»»««
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